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एक बार फिर विवादों में EVM

लेखक- हिमांशु तिवारी

सोमवार को लोकसभा के चार और विधानसभा के दस सीटों के लिए हुए उप-चुनाव के दौरान एक बार फिर ईवीएम पर सवाल उठे। एक दो नहीं करीब तीन सौ ईवीएम में गड़बड़ी के खुलासे के बाद चुनाव आयोग को सफाई देते नहीं बन रहा है। ईवीएम में गड़बड़ी के खुलासे के बाद महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में जमकर राजनीति हुई। महाराष्ट्र में बीजेपी से अलग होकर चुनाव लड़ रही शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने इसे बीजेपी की साजिश करार दिया तो वहीं एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने ईवीएम की जगह बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर डाली। सबसे ज्यादा हंगामा कैराना लोकसभा सीट पर देखने को मिला। जिसे बीजेपी के हिन्दुत्व ऐजेंडे के प्रयोगशाला तौर पर जाना जाता है। कैराना लोकसभा सीट पर एक तरफ बीजेपी की टिकट पर मृगांका सिंह है तो दूसरी तरफ रालोद प्रत्याशी तबस्सुम हसन चुनाव लड़ रही है। मृगांका सिंह के सामने अपने पिता हुकुम सिंह की विरासत को बचाने की चुनौती है तो वहीं तबस्सुम हसन के ऊपर गठबंधन का दांव लगा है। देर शाम कैराना का टेंशन दोनों खेमें में खुलकर दिखाई दिया।
ईवीएम में गड़बड़ी की खबर सामने आते ही एक के बाद एक विपक्षी दलों के नेताओं ने अपनी शिकायत लेकर चुनाव आयोग के दरवाजे पहुंच गए। तबस्सुम ने पत्र लिखकर आयोग से शिकायत की तो वहीं समाजवादी नेता रामगोपाल यादव, रालोद प्रमुख अजीत सिंह कांग्रेस के नेताओं के साथ चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई। बीजेपी की तरफ से भी ईवीएम को लेकर आयोग से शिकायत की गई। मृगांका सिंह ने माना की ईवीएम की गड़बड़ी की वजह से उनके कुछ समर्थक बिना वोट डाले वापस लौट गए। ईवीएम में गड़बड़ी की बात नई नहीं है। लेकिन इतने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा पहली बार हुआ है। चुनाव आयोग की मानें तो गड़बड़ी की शिकायत कुछ मशीनों में थी जिसे बदल दिया गया। ज्यादातर ईवीएम के वीवीपैट ने काम करना बंद कर दिया इसकी एक बड़ी वजह बेतहाशा गर्मी हो सकती है। बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के बाद आयोग ने आश्वासन दिया है कि जरूरत पड़ने पर फिर से चुनाव कराए जाएंगे। हालांकि चुनाव आयोग का अपना दर्द भी है। आयोग की मानें तो ईवीएम और वीवीपैट में खराबी की खबर को मीडिया में बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया। इस तरह की स्थिति का सामना करने के लिए 20 से 25 फीसदी अतिरिक्त मशीनें सेक्टर अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में रखी जाती है। अगर वाकई ये तकनीकी मामला है तो इसे जल्द दुरुस्त किया जाना चाहिए नहीं तो ईवीएम पर राजनीति का चलन बढ़ेगा। इस घटना ने वोटरों के मन में भी ईवीएम को लेकर शक पैदा कर दिया है। आयोग की इस पर गंभीरता से विचार करना होगा।
बीते कुछ समय में ईवीएम को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग और बीजेपी पर सवाल खड़े करता रहा है। पंजाब विधानसभा चुनाव के बाद आम आदमी पार्टी ने, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कारी हार के बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाजवादी पार्टी ने अपनी हार का ठीकरा ईवीएम पर फोड़ा था। गुजरात विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। हालांकि जब चुनाव आयोग के ईवीएम को टैंपर करने का चैलेज दिया तो एनसीपी और सीपीएम की तरफ से कुछ नेता डेमों दखने पहुंचे थे। जिस कांग्रेस पार्टी गुजरात में ईवीएम के विरोध किया था उसने पंजाब और कर्नाटक में ईवीएम पर चुप्पी साधे है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में ईवीएम पर सवाल उठाने वाले समाजवादी और बहुजन समाजवादी नेता फूलपुर और गोरखपुर में अपनी जीत के बाद खामोश हो जाते है। आम आदमी पार्टी पंजाब में ईवीएम पर सवाल खड़े करती है लेकिन दिल्ली में हुए चुनाव में मिली शानदार जीत पर कुछ नहीं कहती है। कुल मिलाकर ईवीएम में गड़बड़ी का आरोप भी जीत हार के हिसाब से बदलता रहता है। ईवीएम एक राजनीति मुद्दा है जिसे चुनाव आयोग को ही समय रहते सुलझाना होना। निष्पक्ष चुनाव करना और वोटर्स के मन की शंका को दूर करना भी चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।




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