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जारी है बुजुर्ग पेंशनर्स के हक की लड़ाई, केंद्र ने अब तक नहीं की कोई मांग पूरी 

राष्ट्रीय संघर्ष समिति 16 मार्च को दीनदयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित गांधी शांति प्रतिष्ठान पर सीडब्ल्यूसी की बैठक आयोजित करेगी। मोदी सरकार से राष्ट्रीय संघर्ष समिति लगातार ईपीएस-95 के लाखों पेंशनर्स की पेंशन में बढ़ोतरी की मांग कर रही है, पर अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। इस दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

ईपीएस-95 के पेंशनर्स के देश भर में किए गए कई आंदोलनों के बावजूद केंद्र ने अब तक सेवानिवृत्त बुजुर्ग पेंशनर्स की कोई मांग पूरी नहीं की है। पेंशनर्स के घावों पर और नमक छिड़कने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (पीएमएसवाईएमवाई) में 100 रुपये का योगदान देने पर 3 हजार रुपये पेंशन की घोषणा की है, जबकि ईपीएस पेंशनर्स ने पहले अपनी पेंशन फंड के लिए 541 रुपये का योगदान दिया था। मौजूदा समय में वह 2150 रुपये का योगदान दे रहे हैं, लेकिन उनकी पेंशन में बढ़ोतरी की किसी को चिंता नहीं है। राष्ट्रीय संघर्ष समिति में एनपीएस,ओआरओपी और कई किसान नेता सक्रिय रूप से शामिल हो गए हैं।

राष्ट्रीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमांडर अशोक राउत ने कहा, “हम किसी के खिलाफ नहीं है। हम इस देश के श्रमिक, जवान और किसान के साथ हैं। इस समय कड़ी मेहनत करने वाले वर्ग के हितों की देखभाल कोई नहीं कर रहा है। हम श्रमिकों के हितों के लिए संघर्ष करेंगे। कल की बैठक में हम अपनी अगली रणनीति पर विचार करेंगे। आगामी लोकसभा चुनाव में हमारे सामने सब विकल्प खुले हुए हैं।“
उन्होंने कहा कि देश की करीब 186 इंडस्ट्रीज में कार्यरत करीब 65 लाख पेंशनर्स  अपने सैलरी से हर महीने 541 रुपये प्रोविडेंट फंड में देते हैं। ये पेंशनर्स पहले कॉरपोरेट सेक्टर, चीनी मिलों, निजी और सरकारी इंडस्ट्रीज में नौकरी करते थे। अब बुढ़ापे में उनकी गाढ़ी मेहनत की कमाई उनके किसी काम नहीं आ रही है।




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