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तीन तलाक बिल: राज्यसभा पर टिकी नजर

नई दिल्ली: गुरुवार को करीब पांच घंटे की गरमागरम बहस के बाद संशोधनों के साथ लोकसभा ने तीन तलाक के बिल को पारित कर दिया। ये बात अलग है कि कांग्रेस और एआईएडीएमके ने वोटिंग से पहले सदन का बहिष्कार किया। बिल पारित होने के बाद सत्ता पक्ष ने कहा कि ये बिल किसी खास समुदाय या समाज के खिलाफ नहीं है, बल्कि उन महिलाओं को संरक्षण मिलेगा जो तीन तलाक की वजह से डर के साए में जी रही थीं। तमाम दावों और प्रतिदावों के बीच ये बिल सोमवार को राज्यसभा में पेश किया जा सकता है।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि विपक्ष को सिर्फ इस बात पर ऐतराज है कि इसमें आपराधिक धारा क्यों जोड़ी गई है। लेकिन वो लोग वोट बैंक के मद्देनजर सोच रहे हैं। ये बात सच है कि बीजेपी को लोकसबा में बिल पारित कराने में किसी तरह की मुश्किल का सामना नहीं करना पड़ा। लेकिन राज्यसभा में राह कठिन होगी।

दरअसल लोकसभा में बहस के दौरान विपक्षी दलों ने कहा कि वो लोग इस बिल के खिलाफ नहीं है। लेकिन बिल में जो प्रावधान है उसकी वजह से मुस्लिम समाज के पुरुषों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। ऐसे में इस बिल को सिलेक्ट कमेटी को भेजा जाए। लेकिन सत्ता पक्ष ने कहा कि कुछ लोग वोट बैंक पॉलिट्किस की वजह से इस तरह की मांग कर रहे हैं। ये बिल तभी अस्तित्व में आएगा जब राज्यसभा भी इसे पारित कर दे।

ये बात अलग है कि संख्या बल के हिसाब से राज्यसबा में सरकार का पक्ष कमजोर है। अगर राज्यसभा की गणित की बात करें तो मौजूदा समय में यूपीए के 112 सदस्य हैं जबकि एनडीए के पास 93 सदस्य है और एक सीट खाली है। इसके अलावा 39 सांसद ऐसे हैं जिनका यूपीए या एनडीए से संबंध नहीं है। 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में किसी बिल को पारित कराने के लिए 123 सदस्यों का समर्थन चाहिए। लेकिन एनडीए इस आंकड़े से दूर है।




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