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पर्यावरण में घुले ज़हर से होने वाली बीमारी पता लगाने में मददगार होगा एम्स

अगर पर्यावरण में घुले ज़हर ने आपको बीमार किया है तो एम्स उसका पता अपने क्लीनिकल इकोटॉक्सीलॉजी लैब से लगा लेगा। मरीज़ के घर के पानी, मिट्टी के सैंपल से मर्ज़ के कारण का पता चलेगा और कोशिश है कि परिवार का कोई और भी उस वजह से बीमारी की चपेट में न आ पाए।

ज़हरीले हवा, पानी या खाना ने अगर आपको बीमार किया है तो एम्स का  लैब वो वजह बता देगा। पर्यावरण में घुले ज़हर से होने वाली बीमारी पता लगाने को लेकर देश का ये पहला लैब है।

अक्सर  देखा और सुना गया है कि  बिना किसी लत के भी लोग उस बीमारी की गिरफ्त में होते हैं जो शायद उन्हें नहीं होना चाहिए। पर्यावरण में घुला ज़हर भी लोगों को बीमार कर रहा है और उस वजह को ये लैब पता लगा रहा है।

एम्स का ये लैब करीब 1 करोड़ की लागत से तैयार हुआ है। जिसके जरिये सैंपल में हैवी केमिकल्स की मौजूदगी का पता लगाया जा रहा है। सैंपल के लिए मरीज़ों को 25 रु से लेकर 1500 रु देने होंगे। बीमारी के बढ़ते ग्राफ के बीच वजहों को तलाशने की ये कोशिश इस बात को लेकर है कि परिवार में उनको आगाह किया जाए जो अनजाने में उस चीज का इस्तेमाल कर रहे हैं जिसने उनके किसी अपने को बीमार किया है। एम्स के सभी विभाग को निदेशक की तरफ से चिट्ठी भेजी गई है कि वो मरीजों से पानी और मिट्टी की सैंपल मंगाए।




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