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योगी राज में बेख़ौफ़ अपराधी

himanshu tiwari

हिमांशु तिवारी

hktiwari009@gmail.com

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के तमाम दावों के बावजूद अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहा है. उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने की बातें महज कागजी साबित हो रहीं हैं. गैंगरेप, लूटपाट, हत्या और अपहरण जैसी घटनाए बदस्तूर जारी है. उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने का दावा कर सत्ता में प्रचंड़ बहुमत के साथ आई भाजपा सरकार के लिए अपराध पर लगाम लगाना बड़ी चुनौती बनती जा रही है. मथुरा, सहारनपुर और जेवर की घटनाएं अपराधियों के बैख़ौफ़ और पुलिस के बेबस होने का सबूत है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि राज्य में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है लेकिन अभी तक योगी सरकार अपराध पर लगाम लगाने में नाकाम रही है. अपराधी लगातार शासन को चुनौती दे रहें हैं. हालांकि पार्टी के कुछ शुभ चिंतकों का कहना है कि इसके पीछे पूर्वर्ती सरकार के समर्थकों का हाथ है. अगर इन बातों को मान भी लिया जाए तो क्या सरकार और सत्ताधारी दल की यह जिम्मेदारी नहीं है कि अपराधियों पर लगाम लगाए और आम नागरिक के लिए भय मुक्त वातावरण तैयार किया जाए.

5 अप्रैल को मुजफ्फरनगर में बीजेपी नेता की गोली मारकर हत्या और 24 अप्रैल को इलाहाबाद में माता-पिता और दो बेटियों की हत्या. ग्रेटर नोएडा में गोकशी के आरोप में 2 लोगों की पिटाई और अलीगढ़ में गोकशी के आरोप में 6 लोगों की पीट-पीटकर हत्या. राजधानी लखनऊ में आईएएस अधिकारी का शव मिलना तथा जेवर में चार महिलाओं के साथ गैंगरेप और इस दौरान बचाने की कोशिश करने वाले परिवार के सदस्य की हत्या इस बात के प्रमाण है कि अपराधियों के बीच शासन का ख़ौफ़ नाम मात्र का भी नहीं है. योगी आदित्यनाथ के सीएम बनने के बाद जिस तरह से उत्तर प्रदेश में एक के बाद एक बड़े फैसले लिए गए उसके बाद माना जा रहा था कि सरकार अपराधियों पर भी नकेल कसने में कामयाब होगी लेकिन फिलहाल इस दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है.

सीएम योगी एक अनुभवी नेता है लेकिन उन्हे इस बात को नहीं भूलना चाहिए की दादरी में गौमांस के नाम पर अखलाक की हत्या के बाद पीएम मोदी के खिलाफ पूरे देश में किस तरह से माहौल बनाने की कोशिश की गई. विपक्ष के अलावा कुछ सहित्यकारों ने अवार्ड वापसी का जो अनोखा खेला था उसे भुलाया नहीं जा सकता. उस वक्त यूपी के सीएम अखिलेश यादव थे लेकिन अब केंद्र और राज्य दोनों जगह भाजपा की सरकार है. ऐसे में योगी सरकार की छोटी से छोटी लापरवाही आने वाले समय में पार्टी के लिए बड़ी मुश्किल साबित हो सकती है. सहारनपुर में बढ़ते तनाव को जल्द से जल्द काबू नहीं किया गया तो सहारनपुर योगी सरकार के लिए आने वाले चुनावों में गले की हड्ड़ी साबित होगा. अखिलेश और योगी सरकार के कार्यकाल में हुए अपराध की तुलना की जाए तो मुजफ्फरनगर और सहारनपुर के हालात काफी मिलते जुलते हैं वहीं जेवर में जिस तरह से चार महिलाओं को गाड़ी से उतार कर उनके साथ गैंगरेप किया गया उसने बुलंदशहर गैंगरेप की जख्मों को ताजा कर दिया है. एक तरफ योगी सरकार एंटी रोमियों सेल बनाकर सूबे में मनचलों पर रोक लगाने की कोशिश कर रही है वहीं जेवर जैसी घटना का होना पुलिस की नाकामी को दर्शाता है. पुलिस का भी अपना रोना है, 20 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में अपराध रोकने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है. लेकिन इस सब के बावजूद योगी प्रशासन उत्तर प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने की अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ नहीं सकता है.     




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