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COVID 19: जानिए क्यों जरूरी है सोशल डिस्टेंसिंग

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। भारत में अभी तक 654 मामले आये हैं, जिनमें से 12 संक्रमितों की मौत हो चुकी है। वायरस के संक्रमण को रोकना है तो इसकी चेन को तोड़ना होगा। कोरोना वायरस से जारी इस जंग में इसके लिए जनता को सरकार द्वारा जारी निर्देशों का पालन करना जरूरी है और उसमें सबसे अहम है सोशल डिस्टेंसिंग।

क्या है सोशल डिस्टेंसिंग

इन दिनों ‘सामाजिक दूरी’ (सोशल डिस्टेंसिंग) जैसा शब्द कई बार सुना होगा। असल में इसके अंतर्गत लोगों को भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से रोका जाता है। लोगों को भीड़ में जाने से रोकने के लिए देश भर में रेल सेवाएं बंद कर दी गईं। 32 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में धारा-144 लागू कर दी गई और लॉकडाउन कर दिया गया। ताकि लोग बाहर नहीं निकलें। ताज महल, जामा मस्जिद, कुतुब मिनार, आदि सभी ऐतिहासिक इमारतों में प्रवेश बंद है। मॉल, पब, रेस्तरां, सिनेमा हॉल, जिम, आदि सब बंद हैं। यहां तक प्राइवेट कंपनियों ने अपने कर्मियों को वर्क फ्रॉम होम दे दिया है।

 क्यों जरूरी है सोशल डिस्टेंसिंग

– कोरोना वायरस से संक्रमित कोई व्यक्ति खांसता या छींकता है तो उसके थूक के बेहद बारीक कण हवा में फैलते हैं
– इन कणों में कोरोना के वायरस होते हैं, कई बार ये वायरस देर तक हवा में रहते हैं
– संक्रमित व्यक्ति के पास जाने पर वायरस के कण दूसरे व्यक्ति के मुंह के रास्ते शरीर में प्रवेश कर सकते हैं
– इसके अलावा अगर किसी का हाथ ऐसी जगह टच हो जाता है , जहां वायरस के कण गिरे हैं और अगर वह व्यक्ति उसी हाथ से अपनी आंख, नाक या मुंह को छूता है तो ये कण शरीर में पहुंचते हैं
– सोशल डिस्टेंसिंग यानी आस-पड़ोस, दोस्त, रिश्तेदार से बाहर जाकर न मिलें, न ही किसी को घर बुलाएं
– सोशल डिस्टेंसिंग के तहत ही प्राइवेट और कई सरकारी क्षेत्र के संस्थान ने अपने कर्मचारियों से घर से काम करने को कहा है

सोशल डिस्टेंसिंग से मामलों का ग्राफ नीचे आएगा

 देश के प्रमुख स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान आईसीएमआर के अनुसार सामाजिक दूरी (सोशल डिस्टेंसिंग) बनाने के सुझाव का कड़ाई से पालन करने से कोरोना वायरस महामारी के कुल संभावित मामलों की संख्या 62 प्रतिशत तक कम हो जाएगी।कोविड-19 के प्रसार की शुरूआती समझ के आधार पर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने जो गणितीय मॉडल तैयार किया है, उसके मुताबिक कोरोना वायरस के संदिग्ध लक्षणों वाले यात्रियों की प्रवेश के समय स्क्रीनिंग से अन्य लोगों में वायरस के संक्रमण को एक से तीन सप्ताह तक टाला जा सकता है।

आईसीएमआर ने कहा, ‘‘कोरोना वायरस के लक्षणों वाले और संदिग्ध मामलों वाले लोगों के घरों में एकांत में रहने जैसे सामाजिक दूरी बनाने के उपायों का कड़ाई से पालन करने से कुल संभावित मामलों की संख्या में 62 प्रतिशत की और सर्वाधिक मामलों की संख्या में 89 प्रतिशत की कमी आएगी। और इस तरह से ग्राफ समतल हो जाएगा तथा रोकथाम के अधिक अवसर मिल सकेंगे।’’




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