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रोजमर्रा के दो दर्जन सामानों पर घटाई जा सकती हैं जीएसटी

जीएसटी काउंसिल की शनिवार को होने वाली बैठक में लक्जरी और मिड साइज कारों पर लगने वाले सेस में बढ़ोतरी किए जाने का फैसला लिय जा सकता है। सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) काउंसिल की कल होने वाली बैठक में आम लोगों के इस्तेमाल में लाई जाने वाली कई वस्तुओं पर लगने वाले टैक्स दरों में मौजूद खामियों को दूर किया जा सकता है।

अधिकारी ने बताया कि वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में इडली, डोसा, कस्टर्ड पाउडर, इमली, किचेन गैस लाइटर समेत दो दर्जन से अधिक प्रॉडक्ट्स की कीमतों में कटौती की जा सकती है।

देश में एक अगस्त से जीएसटी को लागू किया जा चुका है, जिसने 16 अप्रत्यक्ष करों की जगह ली है। गौरतलब है कि बिना ब्रांडेड फूड प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है वहीं ब्रांडेड और पैकेज्ड फूड पर 5 फीसदी जीएसटी वसूली जाती है। यही वजह रही है कि कई कारोबारी अपने ब्रांड को डीरजिस्टर कर रहे हैं।

वहीं लग्जरी और मिड साइज कारों पर लगने वाले सेस की दरों पर कल फैसला लिया जाएगा। 5 अगस्त की पिछली बैठक में जीएसटी काउंसिल ने मझोले और बड़े साइज की कारों के साथ, एसयूवी , हाईब्रिड और लग्जरी कारों पर मौजूदा 15 फीसदी से सेस को बढ़ाकर 25 फीसदी तक किए जाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी।

हालांकि कार कंपनियां इस सेस में बढ़ोतरी किए जाने के प्रस्ताव को टाले जाने का विरोध कर रही हैं। लेकिन परिषद ने इसे बढ़ाने का फैसला कर लिया है क्योंकि कुछ मामलों में जरूरी सामानों पर लगने वाला टैक्स लग्जरी गुड्स पर गलने वाले टैक्स से कम है।

जीएसटी लागू होने के बाद कार की कीमतों में 3 लाख रुपये तक की कमी आई है। जीएसटी से पहले मोटर वाहनों पर कुल 52-54.72 फीसदी का टैक्स देना पड़ता था, जिसमें 2.5 फीसदी सेंट्रल टैक्स और ऑक्ट्रोई के खाते में जाता था। वहीं जीएसटी के लागू होने के बाद कुल टैक्स 43 फीसदी बनता है। जीएसटी के बाद कारों पर अधिकतम 28 फीसदी टैक्स का भुगतान करना पड़ता है।




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