दावोस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी में दिया भाषण, कहा- 21वीं सदी में विकास ने कुछ सवाल भी खड़े किए हैं

स्विट्जरलैंड के दावोस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हिंदी में भाषण दिया. विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के प्लेनरी सेशन को पीएम मोदी ने संबोधित किया. 21 साल बाद भारत का कोई प्रधानमंत्री दावोस पहुंचा है. प्रधानमंत्री ने कहा कि दावोस में भारत की शुरुआत 1997 में हुई थी जहां तत्कालीन प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा दावोस पहुंचे थे. तब से लेकर अब तक भारत की जीडीपी 6 गुना हो चुकी है. उस वक्त इस मंच का स्लोगन था बिल्डिंग दि नेटवर्क सोसाइटी. आज हम सिर्फ नेटवर्क सोसाइटी ही नहीं बल्कि बिग डेटा, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के युग में जी रहे हैं.

भारत की आर्मी को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि  जब विश्व दो विश्वयुद्धों के संकट से गुजरा तब अपना कोई निजी स्वार्थ न होते हुए भी, कोई आर्थिक या प्रादेशिक हित न होते हुए भी भारत शांति और मानवता के उच्च आदर्शों की सुरक्षा के लिए खड़ा हुआ.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1997 में बहुत कम लोगों ने ओसामा बिन लादेन का नाम सुना था और कंप्यूटर से हारने का डर शतरंज के खिलाड़ियों में नहीं था. उस वक्त इंटरनेट पर आपको जंगल और नदियों के बारें में जानकारी मिलती थी.

आज दो दशकों के बाद हमारा समाज एक जटिल नेटवर्क से बंधा है, उस वक्त भी दावोस अपने समय से आगे था और आज भी वह आगे है. इस वर्ष क्रिएटिंग अ शेयर्ड वर्ल्ड इसका थीम है.

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के प्लेनरी सेशन में कीनोट एड्रेस के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मंच पर पहुंच चुके हैं. सेशन की शुरुआत करते हुए स्विटजरलैंड के राष्ट्रपति अलेन बर्सेट ने ग्लोबल इकोनॉमी बदलाव के दौरान से गुजर रही है. पीएम ने कहा कि भारत ने कभी किसी दूसरे देश के भौगोलिक और राजनीतिक इच्छा नहीं रखी हम सिर्फ दूसरे देशों का विकास चाहते हैं.

अपने 3D मॉ़डल को वैश्विक मंच से साझा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत में डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डायनेमिज्म मिल कर डेवलपमेंट को साकार कर रहे हैं, डेस्टिनी को आकार दे रहे हैं. वहीं GST को लेकर पीएम ने कहा कि 70 साल के स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार देश में एक टैक्स की व्यवस्था की गई. पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए हम तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं.

बैठक में 350 राजनीतिक नेता, इनमें 60 से अधिक राष्ट्र और शासन प्रमुख, विश्व की महत्वपूर्ण कंपनियों के कार्यकारी अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के 1000 से अधिक नेताओं ने हिस्सा लिया.




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