BREAKING NEWS -
Search

नौकरशाही में सुधार से ही आर्थिक शक्ति बनेगा भारत

इन दिनों देश और दुनिया के अर्थविशेषज्ञ यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 2024 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर की बनाने के अपने सपने को साकार करना चाहते हैं तो नौकरशाही को जवाबदेह बनाना सबसे जरूरी है। निश्चित रूप से जवाबदेह नौकरशाही के आधार पर ही विकास के आर्थिक-सामाजिक लक्ष्यों को प्राप्त किया जा सकता है। एक ओर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नौकरशाही को गतिशील करने के लिए उत्साहवर्धन कर रहे हैं। वहीं भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने तथा पेशेवर प्रतिभाओं को नौकरशाही में लेटरल इंट्री से प्रवेश का दायरा बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।

18 जून को केन्द्र सरकार ने सीमा शुल्क एवं केन्द्रीय उत्पाद शुल्क के 15 अधिकारियों को जबरन सेवानिवृत्ति दे दी। इससे पहले 10 जून को 12 भ्रष्ट आयकर अधिकारियों को बर्खास्त किया गया था। केन्द्र सरकार ने कहा है कि किसी भी कीमत पर भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। देश में नौकरशाही में सुधार का एक चमकीला बिन्दु यह है कि विभिन्न क्षेत्रों की पेशेवर प्रतिभाओं को सरकारी तंत्र में लेटरल इंट्री से प्रशासन से जुड़ने और सहभागी बनने का दायरा तेजी से बढ़ाया जा रहा है।

हाल ही में 12 जून को मोदी सरकार के निर्देश पर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले निजी क्षेत्र के अधिकारियों को उपसचिव और निदेशक स्तर के पदों पर भर्ती करने के औपचारिक प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। कहा गया है कि शुरू में ऐसे कुल 40 अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है। यह नियुक्तियां नीति आयोग द्वारा की जाएगी। इसी प्रकार कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने भी कहा है कि सरकार कंपनियों में निजी क्षेत्र के पेशेवरों को स्वतंत्र निदेशक बनने के लिए ऑनलाइन परीक्षा कराने की तैयारी कर रही है। इससे कंपनी कानून, नीतिशास्त्र और पूंजी बाजार की जानकारी रखने वाले ही कंपनी में स्वतंत्र निदेशक बन पाएंगे। सरकार का मानना है कि विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने क्षेत्रों में प्रशासनिक अधिकारियों की तुलना में अच्छे परिणाम दे सकते हैं।

अमेरिका, ब्रिटेन, न्यूजीलैंड जैसे कई देशों में निजी क्षेत्र के पेशेवरों का प्रयोग सफल दिखाई दिया है। देश में नौकरशाही में लैटरल एंट्री का पहला प्रस्ताव 2005 में आया था। तब इसे खारिज कर दिया गया था। 2010 में दूसरी प्रशासनिक सुधार रिपोर्ट में भी इसकी अनुशंसा की गई। 2014 में केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद 2016 में इसकी संभावना तलाशने के लिए एक कमेटी बनाई गई। इस कमेटी ने इस पर आगे बढ़ने की अनुशंसा की। जुलाई 2017 में केन्द्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश जारी किया था। तब कहा गया था कि लैटरल एंट्री से पेशेवर प्रतिभाओं और मध्यम स्तर के अधिकारियों की कमी को दूर किया जा सकेगा। अब निश्चित रूप से अनुभवी कुशल भारतीय पेशेवर प्रशासन का सक्रिय भाग बनकर देश के विकास को गति दे सकते हैं। मोदी सरकार के पहले भी विभिन्न प्रधानमंत्रियों द्वारा कुछ-कुछ प्रतिभाओं और पेशेवरों को सरकार के कार्यों में सहयोग हेतु जिम्मेदारी सौंपी जाती रही है। यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल में नंदन नीलेकणी को लाया गया। इंदिरा गांधी भी नियमित रूप से कारोबारी जगत की प्रतिभाओं को बेहतर उपयोग में लाती रही। दूरसंचार में क्रांति के लिए राजीव गांधी सैम पित्रोदा को लाए।

अटलबिहारी वाजपेयी ने आरवी शाही को बिजली सचिव की महत्वपूर्ण भूमिका दी थी। वीपी सिंह ने अरुण सिंह को जवाबदारी देकर देश के रक्षा संगठन का आधुनिकीकरण करने के कदम उठाए। नरसिम्हा राव भी हरसंभव बेहतरीन प्रतिभाएं जुटाने में सफल हुए। वह मनमोहन सिंह को लाए और उन्हें सीधे वित्तमंत्री बना दिया। मनमोहन सिंह मोंटेकसिंह आहलूवालिया को लाए। यद्यपि सरकारी तंत्र में निजी क्षेत्र के पेशेवरों और क्षमतावान विशेषज्ञों की संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्तियां लाभप्रद दिखाई दे रही हैं, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां भी होंगी। पिछली बार सरकारी तंत्र में लैटरल एंट्री से नियुक्ति की जो प्रक्रिया शुरू हुई है, उसकी उपयुक्तता पाई गई है।

अब सरकार द्वारा नियामकीय प्रमुखों की खोज का दायरा बढ़ाया जा रहा है। देश के निजी क्षेत्र में प्रतिभाओं की भरमार है। सरकार इनकी सहायता से अपने नीतिगत निर्णयों की प्रक्रिया में सुधार कर सकती है। हम आशा करें कि मोदी सरकार के द्वारा देश और विदेश में गहरे कार्य अनुभव रखने वाली पेशेवर प्रतिभाओं का प्रशासन में पूरा लाभ लिया जाएगा। हम आशा करें कि मोदी सरकार द्वारा अपने दूसरे कार्यकाल में नौकरशाही में सुधार के विभिन्न प्रयासों से नौकरशाही में भ्रष्टता कम होगी। नौकरशाही उत्साह औऱ गतिशीलता के साथ काम करते हुए दिखाई देगी तथा नौकरशाही में बड़ी संख्या में लैटरल इंट्री से अच्छे पेशेवर आएंगे। ऐसे में नौकरशाही का बदला हुआ चमकीला ढांचा उम्मीदों से भरे चमकीले भारत के सपने को मूर्तरूप देने तथा देश को विकसित देश और आर्थिक शक्ति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

 




>