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जगत प्रकाश नड्डाः एक सफल संगठनकर्ता

मनोज कुमार तिवारी

एक कुशल संगठक, मिलनसार व्यक्तित्व और टारगेट को पूरा करने का जुनून जिनकी खासियत है वह हैं जगत प्रसाद नड्डा (जेपी नड्डा)। उन्हें भारतीय जनता पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा वह हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा सदस्य भी हैं। बिहार की राजधानी पटना में 2 दिसंबर 1960 को जन्में नड्डा ने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पटना विश्वविद्याल से की। फिर यहां से कुछ करने का जज्बा लिए एलएलबी की पढ़ाई के लिए उन्होंने हिमाचल प्रदेश का रुख किया। हिमाचल प्रदेश उनकी कर्मभूमि और पहचान बनेगी यह केवल नियती को ही मालूम था।

जेपी आंदोलन से प्रभावित नड्डा हालांकि राजनीति का ककहरा तो बिहार से ही सीख चुके थे लेकिन पहचान मिली साल 1984 में।  हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के पहले अध्यक्ष बनने का कीर्तिमान अपने नाम किया। इसके बाद तो फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 1989 में एबीवीपी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री एवं 1991 में भारतीय युवा जनता मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। जेपी नड्डा 1993 में पहली बार हिमाचल प्रदेश से विधायक चुने गए। साथ ही 1994 से 1998 तक विधानसभा में पार्टी के नेता भी रहे। 1998 में दोबारा विधायक बने नड्डा को स्वास्थ्य और संसदीय मामलों का मंत्री बनाया गया। साल 2007 में प्रेम कुमार धूमल सरकार में उन्हें वन-पर्यावरण, विज्ञान व टेक्नालॉजी विभाग का मंत्री के दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया।

इस दौरान पार्टी ने उनके अंदर की संगठन क्षमता को पहचान लिया था। जिसके चलते उन्हें 2010 में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री का दायित्व दिया गया।  इसके बाद तो केंद्रीय राजनीति में उनकी धमक बढ़ती चली गयी। नड्डा जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, केरल, राजस्थान, महाराष्ट्र, समेत अनेक राज्यों का प्रभारी और चुनाव प्रभारी भी रह चुके हैं। उन्होंने नितिन गडकरी के कार्यकाल में बतौर राष्ट्रीय महामंत्री कार्य किया।

साल 2012 में उन्हें राज्यसभा का सांसद चुना गया। 2014 में भाजपा की पार्लियामेंटरी बोर्ड का सचिव और मोदी के पहले कार्यकाल में 2014 में ही स्वास्थ्य मंत्री का दायित्व मिला। इस दौरान उन्होंने कर्मठता से अपने दायित्वों को निभाया। इसके अलावा इसी वर्ष 17 वीं लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश का चुनाव प्रभारी बनाया गया। और मोदी के नेतृतव और नड्डा के संगठन क्षमता ने देश के सबसे बड़े सूबे में गठबंधन के बावजूद भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया। इससे प्रभावित होकर केंद्रीय नेतृत्व ने उन्हें भाजपा का कार्यकरी अध्यक्ष बनाकर उनके कार्यों का इनान उन्हें मिला। साल के अंत तक महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड में चुनाव है। जिसमें नड्डा को एक बार फिर अपनी कार्यकुशलता को सिद्ध करने की चुनौती है।




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