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विद्या के मंदिर में मासूम की हत्या

हिमांशु तिवारी  

hktiwari009@gmail.com

विद्यालय यानी की विद्या का मंदिर, एक पवित्र स्थान जहां पर बच्चों के भविष्य को संवारने का काम किया जाता है। लेकिन जब इसी मंदिर में हत्या और दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध होने लगे तो न सिर्फ मंदिर की पवित्रता कलंकित होती है बल्कि उन बच्चों का भविष्य भी अधर में लटक जाता है जो वहां पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल प्रबंधन और बच्चों के माता-पिता के बीच का भरोसा टूट जाता है और फिर ईमानदार कोशिशें भी शक के दायरे में आने लगती हैं। गुरुग्राम के रेयान इंटरनेंशन स्कूल में जो हुआ उसे किसी भी हालात में माफ नहीं किया जा सकता है।

हरियाणा की खट्टर सरकार ने स्कूल प्रबंधन और मालिक के खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 75 के तहत केस दर्ज किया है लेकिन साथ ही शिक्षा मंत्री राम विलास शर्मा ने यह भी साफ किया है कि स्कूल में करीब बारह सौ छात्र है ऐसे में स्कूल का लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता है। जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धारा 75 के तहत बच्चों के देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल की है। यह स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि हर हाल में स्कूल परिसर में बच्चों के सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाए। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो पांच साल की सजा और पांच लाख रुपये जुर्माना का प्रावधान है। अगर किसी बच्चे के साथ क्रूरता बरते जाने से वह मानसिक बीमारी के चपेट में आ जाता है तो 3 से 10 साल की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।    

स्कूल की फीस 45 हजार रुपये तीमाही लेकिन स्कूल में एक ही टॉयलेट है जिसका इस्तेमाल बच्चे और कर्मचारी दोनों करते हैं। स्कूल की बाउंड्री भी टूटी हुई है। सीसीटीवी कैमरों को सही तरह के लगाया गया। स्कूल के नाम पर चलने वाली बसों का कोई भी रिकार्ड आरटीए के पास नहीं है ऐसे में इन बसों के चालकों और कंडक्टरों के रिकार्ड का होने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। इससे पहले बसंतकुंज स्थित रायन स्कूल में एक बच्चे का शव मिला था। स्कूल की स्थिति को देखकर यह साफ हो जाता है कि स्कूल प्रबंधन सिर्फ और सिर्फ पैसा कमाने में व्यस्त था और संबंधित विभाग जिसे इन मामलों की जांच करनी उन सभी ने अपनी जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभाई।

फिलहाल पुलिस ने आरोपी बस कंडक्टर को गिरफ्तार कर जांच शुरू कर दिया है लेकिन आरोपी के बहन का कहना है कि उसके भाई को पीटा गया और उस पर झूठा बयान देने के लिए दबाव डाला गया। इस मामले में पुलिस और स्कूल प्रबंधन मिला हुआ है। आरोपी के पिता और बस का ड्राईवर भी कंडक्टर के बचाव में बात कर रहें है। इन दोनों की मानें तो कंडक्टर को फंसाया जा रहा है। तो क्या पुलिस महकमा जानबूझकर इक केस को कमजोर करने की कोशिश में है ताकि स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों को इस केस में फायदा हो सके।

यह सौ फीसदी सच है कि इस तरह की यह कोई पहली घटना नहीं है। लेकिन हर बार कुछ समय के लिए लोगों का गुस्सा उबाल मारता है और लोग सड़कों पर उतर कर, उस स्कूल के सामने अपना विरोध जताते है। कई दफा तो विरोध करने वाले पेरेंट्स को पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ती हैं। जांच के नाम पर खानापूर्ति से ज्यादा कुछ और नहीं होता है। किसी कमजोर को बलि का बकरा बना दिया जाता है और दूसरे बच्चों के भविष्य का हवाला देकर स्कूल का लाइसेंस रद्द करने से सरकार मना कर देती है। बमुश्किल दो चार दिन तक पेरेन्ट्स एकजुट रहते है फिर धीरे-धीरे यह लड़ाई उस बच्चे के माता-पिता की निजी लड़ाई बन जाती है जो इस हादसे का शिकार होता है। तमाम तरह के कानून और दिशानिर्देशों के बावजूद आज भी शिक्षा के मंदिर में मासूमों की हत्या और उनके साथ दुष्कर्म जैसे अपराध पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लगाया जा सका है। इसके पीछे एक बड़ी वजह शिक्षा माफियाओं को प्रशासन और राजनेताओं से मिलने वाला मौन समर्थन है।

लाखों करोड़ों नहीं अरबों के इस कारोबार में समाज का हर बड़ा वर्ग शामिल है। अगर ऐसा नहीं है तो जो लोग आज बड़ी-बड़ी बातें करते नहीं थक रहे हैं वो कल तक खामोश क्यों थे। शुरुआती जांच में जो खुलासा हुआ है वह बड़ी लापरवाही की तरफ इशारा करता है। अब प्राइवेट स्कूल शिक्षा का केंद्र कम और कमाई का अड्डा ज्यादा हो गए है। शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो न हो लेकिन फीस में इजाफा होना तय है। जो पैनेंट्स इसका विरोध करते हैं उनके बच्चों का नाम काटकर दूसरे स्कूलों में जाने के लिए बाध्य कर दिया जाता है। रेयान जैसे स्कूलों में एक बच्चे से जितनी फीस वसूली जाती है उतना इस देश के एक समान्य परिवार का पूरे महीने का खर्च है। फिर भी स्कूल प्रबंधन इस बात की गारंटी नहीं दे पाता है कि बच्चा सही सलामत शाम को अपने घर पहुंच जाएगा।




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