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स्वामी विवेकानंद के विश्व प्रसिद्ध शिकागो भाषण की 125वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने ‘वन एशिया’ नारे का किया जिक्र

स्वामी विवेकानंद के विश्व प्रसिद्ध शिकागो भाषण की 125वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने विज्ञान भवन में ‘युवा भारत, नया भारत’ विषय पर युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने एक ओर युवाओं को स्वामी विवेकानंद की ही तरह संकल्प लेने को प्रेरित किया तो दूसरी ओर उनसे आगे आकर देश की समस्याओं को सुलझाने और देश की विविधता में एकता को बढ़ावा देने की अपील की। पीएम ने युवाओं में रचनात्मकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके बिना जिंदगी की सार्थकता नहीं हो सकती। पीएम ने युवाओं में कौशल विकास पर जोर दिया और उनसे आधुनिक भारत के लिए काम करने को कहा।

पीएम ने 125 साल पहले शिकागो में दिए गए स्वामी विवेकानंद के भाषण को आज भी प्रासंगिक बताते हुए कहा कि उन्होंने अपने भाषण से गहरी छाप छोड़ी थी। पीएम ने स्वामी विवेकानंद के ‘वन एशिया’ के नारे का जिक्र किया और कहा कि उन्हों ने कहा था कि दुनिया की समस्‍याओं का समाधान एशिया से निकलेगा। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के भाषण और अमेरिकी में हुए 9/11 आतंकी हमले को याद करते हुए कहा कि हम विवेकानंद के 9/11 को नहीं भूलते तो 21वीं सदी का 9/11 नहीं होता।

सरकार नौजवानों को रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार सृजन करने वाला बनाना चाहती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विवेकानंद आधुनिक विचारों के प्रवर्तक थे तथा घिसीपिटी बातों को छोड़ने के पक्षधर थे। पीएम ने कहा कि असफलता ही सफलता की सीढ़ी होती है। किनारे पर खड़े रहने वाला व्यक्ति डूबता नहीं है लेकिन सफल वहीं होता है जो लहरों को पार करने का साहस दिखाता है। पीएम ने मेक इन इंडिया, स्टार्टअप योजना को विवेकानंद के विचारों से ही प्रेरित बताया और कहा कि उन्होंने उस समय ही इसके बारे में बात कही थी। पीएम ने देश की पहली हरित क्रांति का श्रेय भी विवेकानंद को ही दिया। पीएम ने सबके मन में हर राज्य और हर भाषा के प्रति गौरव का भाव भरने की अपील करते हुए कहा कि इसके बिना अनेकता में एकता का भाव साकार नहीं होगा।

पीएम ने स्वच्छता पर भी काफी जोर दिया और कहा कि अगर देश में सबसे पहले किसी को वंदे मातरम बोलने का हक है तो वो सफाई का काम करने वाले हैं।

पीएम ने अस्पतालों और अपने आसपास की सफाई के लिए लोगों की तारीफ की और कहा कि स्वच्छ भारत अभियान का असर है कि बेटियों ने टॉइलट नहीं होने पर ससुराल जाने से मना कर दिया। स्वामी विवेकानंद के भाषण की 125वीं वर्षगांठ पर ये कार्यक्रम दीनदयाल शोध संस्थान की ओर से आयोजित किया गया था और पीएम ने इस मौके पर दीनदयाल उपाध्याेय की जन्म शती वर्ष पर भी चर्चा की और उनके अंत्योदय के विचारों की अहमियत बताई।




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