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ऐसे बदला एक्टर संजय मिश्रा की किस्मत का सितारा

संजय मिश्रा का नाम भले ही बॉलीवुड के टॉप सितारों में नहीं आता लेकिन वह बॉलीवुड में काबिल सितारों में जरूर गिने जाते हैं। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1999 में आए एक टीवी शो ‘चाणक्य’ से की थी लेकिन शो से ब्रेक मिलने के बाद संजय को एहसास हुआ कि ये वो काम नहीं है, जिसके लिए वे इंडस्ट्री में आये थे।

बाद में संजय मिश्रा ने सौ से भी ज्यादा फिल्मों में काम किया लेकिन उन्हें ज्यादा सफलता नहीं मिली। इसके बाद वह फिल्में छोड़ कर ढाबे पर काम करने लगे तो उन्हें किसी ने नहीं पहचाना। समय के साथ उनका वक्त बदला और कभी मुफलिसी में दिन बिताने के बाद उनकी किस्मत का सितारा फिर से चमक उठा। आज अपनी उम्दा अभिनय कला की वजह से वे करोड़ों के मालिक हैं।

संजय मिश्रा का जन्म छह अक्टूबर. 1963 को बिहार के दरभंगा में हुआ था । उनके पिता शम्भूनाथ मिश्रा जर्नलिस्ट थे जबकि उनके दादा जिलाधिकारी थे। एक्टर और कॉमेडियन सजंय जब नौ साल के थे तो उनका परिवार वाराणसी शिफ्ट हो गया था। संजय ने अपनी स्कूली पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय बीएचयू कैम्पस से की। इसके बाद स्नातक करने के बाद उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (एनएसडी) ज्वाइन कर लिया।

संजय मिश्रा एक ऐसा अभिनेता रहे जिसने अपने करियर के शुरुआत में चाणक्य सीरियल की शूटिंग के पहले सीन में 28 रीटेक लिये लेकिन आज वो बॉलीवुड के जाने पहचाने चेहरों में से एक हैं। अमिताभ बच्चन के साथ मिरिंडा के विज्ञापन में आने से पहले संजय ने कई और विज्ञापनों और फिल्मों में छोटे रोल किये। उनकी पहली फिल्म थी ‘ओह डार्लिंग ये है इंडिया’ जिसमें उन्होंने हारमोनियम बजाने वाले की एक छोटी सी भूमिका अदा की थी। इसके बाद उन्होंने ‘सत्या’ और ‘दिल से’ जैसी फिल्मों में काम किया।

हास्य-व्यंग्य से भरपूर ‘ऑफिस-ऑफिस’ में निभाया उनका शुक्ला जी का किरदार भी दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बाद संजय ने करीब 100 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया लेकिन ‘मसान’ और ‘आंखों देखी’ फिल्मों में उनके जबर्दस्त अभिनय की तारीफ उनके आलोचकों ने भी की। जब संजय के पिता की मृत्यु हुई तो वो एक्टिंग छोड़कर ऋषिकेश चले गए थे। जहां वो एक ढाबे पर काम करने लगे।

दरअसल संजय अपने पिता के बहुत करीब थे। पिता की मौत ने उनको ऐसा झकझोरा कि वो गुमशुदा हो गए और अकेला महसूस करने लगे। उनका वक्त ढाबे पर सब्जी बनाने, आमलेट बनाने में कटने लगा था । संजय अपनी पूरी जिंदगी उस ढाबे पर काम करने में ही निकाल देते अगर रोहित शेट्टी ना होते। रोहित और संजय फिल्म ‘गोलमाल’ में साथ काम कर चुके थे। वो अपनी अगली फिल्म ‘ऑल द बेस्ट’ पर काम कर रहे थे और तभी उन्हें संजय का ख्याल आया। संजय फिल्मों में लौटने को तैयार नहीं थे लेकिन रोहित शेट्टी ने उन्हें मनाया और फिल्म में साइन किया।

‘ऑल द बेस्ट’ फिल्म सुपरहिट हुई और इसके बाद संजय को एक से बढ़कर एक रोल मिलने लगे और संजय का करियर चमक गया। संजय की शादी किरन मिश्रा से हुई है। उनके दो बच्चे हैं पाल मिश्रा और लम्हाक मिश्रा।

‘अपना सपना मनी मनी’ के असली सरजू महाराज बनारस वाले, धमाल फिल्म के बाबूभाई, फंस गए रे ओबामा के भाईसाब, बिन बुलाये बाराती के हजारी, दम लगा के हइसा में आयुष्मान खुराना के पिता और दिलवाले के ऑस्कर भाई को और आल द बेस्ट फिल्म में आरजीवी के रोल के डायलाग को बहुत ही पसंद किया गया। आज संजय के पास फॉर्च्यूनर और बीएमडब्लू जैसी लक्जरी गाड़ियां हैं। पटना और मुंबई में उनके कई घर हैं ।

 




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