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कंडोम/ ओरल पिल के बिना प्रेगनेंसी से बचने के सबसे उपयुक्त दिन

हमारे समाज में एक दुनिया डॉक्टरों, विशेषज्ञों की है तो दूसरी दुनिया सामान्य लोगों की है। विशेषज्ञ मुफ्त में या आसानी से कोई सलाह देते नहीं, इसलिए अक्सर किसी समस्या या रोग की स्थित में लोग विशेषज्ञों से सलाह लेने से पहले आपस में चर्चा जरूर करते हैं। कोई परिचित या मित्र अच्छी-बुरी जैसी भी सलाह देता है तो वे उसे आजमाते भी हैं। कई बार ऐसी सलाह उन्हें बहुत भारी पड़ती है तो कई बार बहुत काम भी आती है। कई बार ऐसा भी होता है कि जिंदगी के अनुभवों के साथ बहुत सी बातें लोगों को खुद ही पता चल जाती हैं।

एक हाउस वाइफ सोनाली और एक कंपनी में मैनेजर उसके पति सुमित की कहानी कुछ ऐसे ही अनुभव और सलाह से जुड़ी है। सोनाली को गर्भनिरोधक गोलियों से परेशानी होती थी तो सुमित को कंडोम के इस्तेमाल से, लेकिन चूंकि सोनाली को परेशानी ज्यादा था, इसलिए सुमित ही कंडोम इस्तेमाल करता था। एक रात सोनाली और सुमित करीब आए तो वह सोनाली के पीरियड यानी माहवारी का 24वां दिन था। व्यस्तता के कारण पिछले दस-बारह दिन बिना सहवास के गुजरे थे इसलिए उत्तेजना चरम पर थी। कंडोम का पैकेट उठाया तो वह खाली निकला। दोनों ही झुंझला गए। फिर कुछ क्षण विचार के बाद दोनों ने तय किया कि प्रेम की नदी में बिना लाइफ गार्ड के ही तैर लेते हैं। उत्तेजना की तेज धार में दोनों तेजी से बह गए। दिलचस्प यह रहा कि वे डूबे नहीं। यानी आशंका के विपरीत सोनाली के पीरियड (माहवारी) सही समय पर हो गए।

सुमित और सोनाली ने एक-दूसरे से सवाल किया कि ऐसा कैसे हुआ? सुमित ने विचार किया कि गर्भनिरोधक गोलियां भी तो हर महीने पीरियड के 22 दिन के बाद बंद कर दी जाती हैं। उन्होंने 24वें दिन सहवास किया। सोनाली को याद आया कि उसने कहीं पढ़ा भी था कि पीरियड के 22दिन बाद और अगले पीरियड होने के बीच गर्भ ठहरने का जोखिम कम रहता है। इस सोच से आत्मविश्वास बढ़ा तो अगले कई महीने भी सोनाली और सुमित ने यह प्रयोग आजमाया। यानी पीरियड के 22 दिन के बीच में जरूरत हुई तो कंडोम का इस्तेमाल और इसके बाद बाकी के पांच दिन कोई उपाय नहीं। सोनाली के पीरियड सही समय पर होते रहे।

कुछ महीनों तक यह प्रयोग बहुत अच्छा चला। कई महीने बाद एक दिन पता चला कि इस बार एक महीना से ऊपर गुजर गया और सोनाली के पीरियड नहीं हुए। चेककप कराया तो वह गर्भवती निकली। डॉक्टर ने पूछा तो सुमित ने उन्हें पूरी बात बताई। डॉक्टर ने कहा, “तुम्हारा प्रयोग तो बढ़िया है, पर यह गर्भ नहीं ठहरने की शत-प्रतिशत गारंटी नहीं है।”

डॉक्टर के अनुसार यह बिल्कुल सही है कि महिला के पीरियड के 22 दिन बाद और अगले पीरियड होने से पहले तक की अवधि गर्भधारण के लिहाज से न्यूनतम जोखिम वाली अवधि है। यानी इस दौरान सहवास किया जाए तो गर्भ ठहरने की आशंका नहीं रहती है, लेकिन यह तरीका शत-प्रतिशत सुरक्षित नहीं है। दरअसल, इस नुस्खे की सफलता में नियमित और सही समय पर होने वाले पीरियड की अहम भूमिका है। यदि पीरियड अनियमित हैं यानी कभी 28 दिन पर, कभी 29 या कभी 31 दिन के बाद होते हैं तो अंतिम पांच (28 दिन के पीरियड में 23 से 27 वें दिन) सुरक्षित दिन का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। इसी मोड़ पर आकर दंपतियों से गड़बड़ हो जाती है।

यदि पीरियड अनियमित हैं इस नुस्खे की सफलता का प्रतिशत बढ़ाने के लिए यह किया जा सकता है कि इस पांच दिन की अवधि को थोड़ा और छोटा कर सकते हैं। यानी अगर आप बिना कंडोम, बिना गोली खाए सहवास करना चाहते हैं तो 23वें और 24वें दिन को भी छोड़ दीजिए और केवल 25-26-27वें दिन को इसके लिए रखिए। हां, पीरियड की अवधि के हिसाब से इन पांच दिनों का सही आकलन जरूरी है, वरना आप भी सोनाली-सुमित की तरह फंस सकते हैं।

पीरियड शुरू होने के बाद शुरुआत के नौ-दस दिन

एक सलाह यह भी सुनने को मिलती है कि पीरियड शुरू होने के बाद शुरुआत के नौ-दस दिन भी गर्भ नहीं ठहरने की दृष्टि से सुरक्षित होते हैं। लेकिन इस सलाह में काफी पेंच हैं। एक तो यह कि शुरू के पांच-छह दिन तो रक्तस्राव ही होता है, इसलिए गर्भधारण नहीं होने की संभावना के बावजूद संक्रमण आदि के कारण इन दिनों सहवास करना ठीक नहीं रहता। रक्तस्राव खत्म होने के ठीक बाद के दिन इसलिए सुरक्षित नहीं कहे जा सकते क्योंकि पुरुष का शुक्राणु महिला के शरीर में सामान्य रूप से 48 घंटे तक जीवित रहता है। कभी-कभी यह इससे ज्यादा अवधि तक भी जीवित रह सकता है। कुछ केसों में यह अवधि एक हफ्ता भी बताई गई है। यानी पीरियड के आठवें या दसवें दिन महिला के शरीर में गया पुरुष का शुक्राणु 12वें दिन भी महिला के अंडाणु से मिल सकता है।

इस लिहाज से पीरियड के सबसे बाद वाले दिन ही सबसे ज्यादा सुरक्षित कहे जा सकते हैं। इस चीज को हम गर्भधारण के लिए सबसे मुफीद दिनों के बारे में जानकर और अच्छी तरह समझ सकते हैं।

गर्भधारण के लिए सबसे मुफीद दिन

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी महिला की माहवारी 28 दिन में होती है तो उसे उस दिन से 15 की गिनती करनी चाहिए जिस दिन उसके शरीर से रक्तस्राव शुरू हुआ। इस गिनती में उस पहले दिन को भी शामिल करें जिस दिन रक्तस्राव शुरू हुआ। इस 15वें दिन पर कैलेंडर में निशान लगा दें। अब इस 15वें दिन से तीन दिन पहले और तीन दिन बाद को भी पेन से निशान लगा दें। इस प्रकार पेन के निशान वाले सात दिन बैठते हैं-12, 13, 14, 15, 16, 17 और 18। यही सात दिन गर्भधारण के लिए सबसे मुफीद होंगे। यदि इन सात दिनों में सहवास किया जाता है तो गर्भवती होने की संभावना 98 प्रतिशत तक रहती है। कुछ विशेषज्ञ गर्भधारण की संभवाना को और ज्यादा बढ़ाने के लिए इन दिनों को सात के बजाय पांच करने की सलाह देते हैं। यानी 15वें दिन से दो दिन आगे और दो दिन पीछे।

अगर माहवारी 28 से ज्यादा दिन में होती है तो एक दूसरा तरीका भी है जो ऊपर वाले दिनों के आसपास ही बैठेगा, मगर दो-तीन दिन का अंतर हो सकता है। तरीका यह है कि जितने दिन में भी माहवारी हो रही है, उसमें से 14 दिन घटा दें। यानी यदि माहवारी 31 दिन में होती है तो उसमें से 14 घटाएं। उत्तर मिला 17। अब गर्भधारण चाहते हैं तो 17वें दिन और इसके आगे-पीछे सहवास करें। यह 17वां दिन 28 दिन वाली माहवारी में भी है, मगर यहां थोड़ा आगे है। यानी इस मामले में 17, 18 ही नहीं 19, 20वें दिन भी गर्भधारण की संभावना होगी और 13वें, 14वें व 15वें दिन भी।

तो क्या माहवारी के इन मध्य वाले दिनों के अलावा बाकी के दिनों में गर्भ नहीं ठहरता? जी नहीं ऐसा नहीं है। बात केवल इतनी है कि ये सात दिन सबसे ज्यादा संभावना वाले दिन हैं, लेकिन यदि किसी महिला के पीरियड के समय में आगा-पीछा है या शरीर में अन्य कोई अनियमितता है तो इन दिनों से कुछ दिन पहले या कुछ दिन बाद भी गर्भधारण हो सकता है। इसके अलावा चूंकि पुरुष का शुक्राणु करीब 48 घंटे और कई बार इससे भी ज्यादा समय तक जीवित रहता है, इसलिए यदि सहवास इन छह-सात दिनों से एक-दो दिन पहले यानी 10वें, 11वें दिन भी किया गया हो तो शुक्राणु एक-दो दिन बाद भी अंडाणु से मिलकर नए जीवन के निर्माण की शुरुआत कर सकता है।

उल्लेखनीय है कि ये पांच-सात दिन वो अवधि है जिसे ओवुलेशन पीरियड कहा जाता है। यह वह अवधि होती है जब महिला के शरीर का तापमान भी कुछ बढ़ जाता है। इस अवधि में अंडाणु फैलोपियन ट्यूब में पहुंचकर पुरुष के शुक्राणु के साथ मिलकर फर्टिलाइजेशन के लिए इंतजार करता है। यदि फर्टिलाइजेशन नहीं होता तो इस तय अवधि के बाद अंडाणु नष्ट होने लगता हैं और फिर रक्त और म्यूकस के साथ शरीर से बाहर निकल जाता है, जिसे हम पीरियड या माहवारी कहते हैं।

सारी बातें जानने के बाद यही निष्कर्ष निकलता है कि यदि आप गर्भधारण नहीं चाहते हैं और साथ में बिना किसी गर्भनिरोधक उपाय के सहवास भी करना चाहते हैं तो इसके लिए पीरियड के सबसे बाद के तीन से पांच दिन ही सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं, मगर ये पांच दिन भी हर महिला के पीरियड की अवधि के हिसाब से अलग-अलग हो सकते हैं।

 




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