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राष्‍ट्रप‍ति ने बर्न विश्वविद्यालय में स्विट्जरलैंड और भारत के बीच नए युग की साझेदारी पर व्‍याख्‍यान दिया

राष्‍ट्रपति राम नाथ कोविंद तीन देशों आइसलैंड, स्विट्जरलैंड और स्‍लोवेनिया की यात्रा के पहले चरण में कल स्विट्जरलैंड पहुंचे। आज सुबह राष्‍ट्रपति बर्न विश्‍वविद्यालय देखने गए, जहां उन्‍होंने छात्रों, संकाय के सदस्‍यों और राजनयिकों को संबोधित किया। उन्‍होंने इस अवसर पर ‘भारत- स्विट्जरलैंड’ नये युग की साझेदारी विषय पर व्‍याख्‍यान भी दिया।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड लंबे अर्से से लोकतांत्रिक मूल्‍यों, बहुलवाद और उद्यम को साझा करते आए हैं। दुनिया आज भारत और स्विट्जरलैंड को सराहना भरी नजरों से देख रही हैं। स्विट्जरलैंड दुनिया के सबसे प्राचीनतम लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍थाओं में से एक है। जहां पर 2000 से ज्‍यादा कम्‍यून लोकतांत्रिक तरीके से काम कर रहे हैं। वहीं भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है जहां 90 करोड़ मतदाता हैं।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सांस्‍कृतिक साझेदारी ने द्विपक्षीय सहयोग के लिए रास्‍ता बनाया। यह काम दोनों देशों के बीच मित्रता की संधि से भी काफी पहले हो चुका था। आज के समय में स्विट्जरलैंड की 250 से ज्‍यादा कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। इसी तरह भारत की बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियां ज्‍यूरिच, बेसल और बर्न में मौजूद हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग और संपर्क बनाने की असीम संभावनाएं मौजूद हैं।

भारत और स्विट्जरलैंड के बीच विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से सहयोग बढ़ रहा है। उन्‍होंने कहा कि इसी तरह भारत की 80 से ज्‍यादा वैज्ञानिक संस्‍थाएं और 300 अनुसंधानकर्ताओं की टीम संयुक्‍त कार्यक्रम के तहत एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। राष्‍ट्रपति ने कहा कि स्विट्जरलैंड नवाचार के मामले में दुनिया में सबका नेतृत्‍व कर रहा है। भारत ‘स्‍टार्टअप्‍स और स्‍मार्ट सोल्‍यूशन’ के क्षेत्र में भी नई उंचाइयां हासिल कर रहा है। आज दुनिया में भारत के पास स्‍टार्टअप्‍स का तीसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है। 21000 से ज्‍यादा उपक्रम रोबोटिक्‍स और विटिलिगो सहित विभिन्‍न क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, मानव स्‍वास्‍थ्‍य सहित कई क्षेत्रों में काम करने के लिए भारत और स्विट्जरलैंड की स्‍टार्टअप्‍स कपंनियों ने हाथ मिलाया है। भारत स्विट्जरलैंड के साथ ऐसी कई और क्षेत्रों में भी साझेदारी की उम्‍मीद करता है।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भारत के पास 100 स्‍मार्ट शहर विकसित करने का महत्‍वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसमें स्विट्जरलैंड के अनुभव काफी मददगार साबित हो सकते हैं। शहरी क्षेत्रों में टिकाऊ स्‍थानों का निर्माण, देश की नदियों की सफाई तथा प्रसंस्‍कृत खाद्य पदार्थ बनाने में काफी मदद मिलेगी। उन्‍होंने कहा कि स्विट्जरलैंड की हरित प्रौद्योगिकी और भारत की हरित ऊर्जा की जरूरतें एक-दूसरे के अनुकूल हैं। आज भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा नवीकरणीय ऊर्जा विस्‍तार कार्यक्रम है। हमने 2022 तक 175 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्‍य रखा है।

श्री कोविंद ने कहा कि भारत में दुनिया की 20 फीसदी आबादी बसती है, लेकिन देश में विश्‍व के नवीकरणीय जल संसाधनों का केवल 4 फीसदी हिस्‍सा है। ऐसे में हम लोग जल संरक्षण के पारं‍परिक तरीकों को पुनर्जीवित करने के साथ ही भू-जल को बचाने के लिए नये तरीकों को भी अपना रहे हैं। 50 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के साथ शुरू किया गया हमारा नया राष्‍ट्रीय जल अभियान- जल जीवन अभियान का उद्देश्‍य 2024 तक 146 मिलियन घरों में नल के पीने का पानी उपलब्‍ध कराने का लक्ष्‍य रखा गया है। इस अभियान में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच सहयोग के नये अवसर मौजूद हैं। भारत सरकार जल प्रबंधन, स्‍वच्‍छ जल के तर्कसंगत इस्‍तेमाल तथा जल शोधन के क्षेत्र में स्विट्जरलैंड सरकार का सहयोग चाहती है।

बाद में शाम को राष्‍ट्रपति स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत सीबी जॉर्ज द्वारा बर्न में आयोजित एक रात्रिभोज कार्यक्रम में भारतीय समुदाय और फ्रेंड्स ऑ‍फ इंडिया को संबोधित करेंगे।




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