BREAKING NEWS -
Search

कुशीनगर हादसा: 13 बच्चों की मौत का कौन है गुनहगार

गुरूवार की सुबह क्षितिज पर सूरज दस्तक दे रहा था। लेकिन कुछ ऐसे भी परिवार थे जिनके सूरज पर ग्रहण लगने वाला था। देश के अलग अलग हिस्सों में तीन हादसे हुए, जिसमें कुछ अब इस दुनिया में नहीं है और कुछ अलग अलग अस्पतालों में जिंदगी की लड़ाई लड़ रहे हैं। दिल्ली के कन्हैया नगर मेट्रो स्टेशन के करीब स्कूली वैन और दूध के टैंकर में टक्कर हुई जिसमें 18 बच्चे घायल हो गए और अब उनमें से एक बच्चा अब इस दुनिया में नहीं है। दिल्ली से करीब 400 किमी दूर लुधियाना में गैस सिलेंडर में धमाका हुआ जिसमें 24 लोग घायल हैं और अस्पतालों में उनका इलाज चल रहा है। लेकिन यूपी के कुशीनगर में एक हादसा ऐसा हुआ जो शायद भुलाए भी भूल पाना मुमकिन नहीं होगा।

ड्राइवर की लापरवाही, गम में डूबे परिवार
कुशीनगर हादसे ने उन परिवारों को गम के सागर में डुबो दिया है। उस हादसे की टीस उन्हें जीवन भर रहेगी। लेकिन सवाल ये है कि कुशीनगर हादसे का गुनहगार आखिर कौन है। मानवरहित क्रासिंग, रेलवे, ईयरफोन या ड्राइवर। गुजरते समय के साथ लोग इस हादसे को लोग भूल जाएंगे। लेकिन उन परिवारों पर विपदा का जो पहाड़ टूट पड़ा है, उसका जवाब शब्दों के जरिए व्यवस्था पर सवाल उठा कर दिया जा सकता है। लेकिन किसी परिवार की वेदना को सांत्वना के शब्दों से कम कर पाना आसान नहीं होता है। उन परिवारों पर आपदा की चोट सिर्फ इसलिए हुई क्योंकि ड्राइवर के कानों में ईयरफोन था और वो संगीत की सुरलहरी में आनंदित हो रहा था। सामने से मौत दस्तक दे रही थी। स्कूल बस के एक्सीलेटर और ब्रेक पर ड्राइवर के पांव जरूर थे। लेकिन दिमाग कहीं और था, नतीजा ये हुआ कि रेलवे ट्रैक पर सरपट भागती ट्रेन ने उन परिवारों की खुशी पर ग्रहण लगा दिया।

यह भी पढ़ें- प. बंगाल पंचायत चुनावः उपराष्ट्रपति और गृहमंत्री से मिले भाजपा कार्यकर्ता, राज्य में की सुरक्षा की मांग, जताया हिंसा होने का शक

सुबह की विदाई बन गई अंतिम विदाई
पीएम नरेंद्र मोदी कुशीनगर हादसे पर दुख जता चुके हैं,सीएम योगी आदित्यनाथ ने पीड़ित परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये मुआवजे का ऐलान कर दिया है। रेलवे ने भी दो-दो लाख रुपये के मुआवजे का ऐलान कर दिया है। इस हादसे की जांच के लिए आदेश भी दे दिए गए हैं। लेकिन उन परिवारों को वो दृश्य याद आ रहे होंगे जब उन्होंने अपने बच्चों को बिस्तर से उठाया होगा। उनको नहा धुलाकर तैयार किया होगा। उन लाडलों की मांओं ने टिफिन बनाया होगा और साथ में लंच के बारे में भी पूछा होगा। चेहरों पर मुस्कान के साथ अपने बच्चों को स्कूल के लिए विदा किया होगा। लेकिन इस बात का भान भी नहीं रहा होगा कि कुछ देर के बाद उन्हें अपने बच्चों की अंतिम विदाई की खबर मिलेगी।

कुछ यूं हुआ था हादसा
कुशीनगर जिले के दुदही रेलवे स्टेशन के नजदीक मानव रहित क्रासिंग पर गुरूवार सुब​ह एक स्कूल वैन के पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आने से कम से कम 13 बच्चों की मौत हो गयी, जबकि आठ अन्य घायल हो गये। उत्तर पूर्व रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी संजय यादव ने ​बताया​ कि हादसा कुशीनगर जिले के कप्तानगंज थावे के पास दुदही रेलवे स्टेशन के पास एक मानव रहित रेलवे क्रासिंग पर सुबह सात बज कर दस मिनट पर हुआ। बच्चों को स्कूल लेकर जा रही एक वैन सिवान गोरखपुर पैसेंजर ट्रेन (55075) की चपेट में आ गयी। पूर्वोत्तर रेलवे का कहना है कि समपार फाटक पर क्रासिंग मित्र तैनात था। उसने वैन ड्राइवर को रोकने की कोशिश की लेकिन ड्राइवर ने उसे अनसुना कर दिया। चालक ने वैन के निकालने की कोशिश की लेकिन शायद वैन बीच पटरी पर अचानक पहुंच कर बंद हो गयी और यह हादसा हो गया।

 




>